Bauddha Sanskriti Ke Vividha Aayam (बौद्ध संस्कृति के विविध आयाम)
₹160.00
| Author | Dr. Aangen Lal |
| Publisher | Uttar Pradesh Hindi Sansthan |
| Language | Hindi |
| Edition | 2nd edition, 2022 |
| ISBN | 978-81-89989-08-8 |
| Pages | 306 |
| Cover | Paper Back |
| Size | 14 x 2 x 22 (l x w x h) |
| Weight | |
| Item Code | UPHS0022 |
| Other | Dispatched in 1-3 days |
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बौद्ध संस्कृति के विविध आयाम (Bauddha Sanskriti Ke Vividha Aayam) भारतीय संस्कृति के मूलाधारों में सत्य, अहिंसा, करुणा, बन्धुता जैसे शाश्वत मूल्य हैं। इन मूल्यों के प्रचार-प्रसार में सैकड़ों वर्षों की अवधि में अन्य धर्मों व संस्कृतियों के साथ-साथ बौद्ध धर्म ने जितना योगदान दिया, वह असाधारण है। मनुष्य को मानवीय गुणों से परिपूर्ण बना कर उसे निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का बौद्ध धर्म का यह महान कार्य भारत की सीमाओं के बाहर तक पहुँचा और आज इसकी उपलब्धियाँ सम्पूर्ण मानव समाज की धरोहर हैं।
यह बौद्ध संस्कृति क्या है और यह कैसे अन्य धर्मों से भिन्न है, यह उत्कंठा स्वाभाविक है। सैकड़ों वर्षों की अवधि और भिन्न-भिन्न भौगोलिक व सांस्कृतिक क्षेत्रों में इसके असाधारण विस्तार को समग्रता में समझना सामान्य पाठक के लिए प्रायः सम्भव नहीं हो पाता। सुप्रसिद्ध इतिहासकार और बौद्ध धर्म मर्मज्ञ डॉ. अँगने लाल ने अपनी इस पुस्तक ‘बौद्ध संस्कृति के विविध आयाम’ में इसी महती आवश्यकता को ध्यान में रख कर अनेक दुर्लभ तथ्यों को न केवल संजोया है बल्कि वे उन्हें क्रमबद्ध ढंग से सरल भाषा-शैली में पाठकों तक पहुँचाने और समझाने में भी सफल रहे हैं।
यह पुस्तक सात अध्यायों में विभक्त है। पहला अध्याय स्वाभाविक रूप से उन बौद्ध सिद्धान्तों और शिक्षाओं को समर्पित है, जिनका विश्व शांति व मानवीय कल्याण में अतुलनीय योगदान है। दूसरा अध्याय बौद्ध साहित्य का संक्षिप्त परिचय देता है जिसमें मुख्यतः पालि व संस्कृत भाषाओं में संकलित वे बुद्ध वचन हैं जिनसे बौद्ध साहित्य पूर्णता पाता है। तीसरे अध्याय में जहाँ श्रीलंका व दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में बौद्ध प्रभाव की संक्षिप्त झलक है, वहीं मध्य एशिया एवं तिब्बत तक उसके विस्तार का भी प्रभावपूर्ण वर्णन है। चौथा अध्याय बोधगया, वेरंजा और नागार्जुनीकोण्डा तथा मथुरा जैसे भारतीय बौद्ध केन्द्रों पर प्रकाश डालता है। पाँचवां अध्याय बौद्ध कला व स्थापत्य को समर्पित है। छठवाँ अध्याय मिलिन्द प्रश्न, अभिधर्म कोश आदि की सारगर्भित भौगोलिक जानकारी देता है, वहीं अन्तिम सातवें अध्याय में, बौद्ध धर्म सम्बन्धी विविध विषयों यथा सर्वास्ति वादःस्रोत साहित्य और विस्तार, भिक्षुसंघ में मतभेद, सम्राट अशोक की धार्मिक सहिष्णुता तथा सुरा मेरेय आदि मादक पदार्थों से दूर रहने के लिये तथागत गौतम बुद्ध के मानव मंगलकारी उपदेश और सन्देश समाहित हैं।







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