Loading...
Get FREE Surprise gift on the purchase of Rs. 2000/- and above.

Bhakti Sudha (भक्ति सुधा)

340.00

Author Sri Hariharanand Saraswati
Publisher Radhakrishna Dhanuka Prakashan Sansthan
Language Hindi
Edition 2016
ISBN -
Pages 1068
Cover Hard Cover
Size 16 x 5 x 23 (l x w x h)
Weight
Item Code KJM0010
Other Dispatched in 1-3 days

10 in stock (can be backordered)

Compare

Description

भक्ति सुधा (Bhakti Sudha) ‘भक्तिसुधा’ ग्रन्थ का पंचम संस्करण सुविज्ञ भक्त एवं रसिक पाठकों के विशेष आग्रह पर श्रीराधाकृष्ण धानुका प्रकाशन की ओर से पुनः प्रकाशित किया जा रहा है। लगभग २५ वर्ष पहले इस ग्रन्थ का प्रकाशन ‘भक्तिसुधा साहित्य परिषद्, कलकत्ता’ द्वारा हुआ था। अति शीघ्र ही इस ग्रन्थ की तीनों खण्डों की प्रतियाँ समाप्त हो गयीं और भक्ति रस से ओतप्रोत पाठकों की इस ग्रन्थ के प्रकाशन की मांग अत्यधिक बढ़ती गयी ।

भक्ति रस के अनेक मार्मिक विषयों के आविर्भाववाले इस महान् एवं मौलिक ग्रन्थ के प्रकाशन की योजना बनी। अन्ततः यह ग्रन्थ आपके सम्मुख हम प्रसन्नतापूर्वक प्रस्तुत कर रहे हैं। धर्मसम्राट् पूज्यपाद स्वामी श्री करपात्रीजी महाराज की लेखनी के विषय में कुछ कहने का तात्पर्य “प्रदीपञ्चालाभिः दिवसकरनीराजनविधिः” श्लोक को दुहराना है। हम श्रीराधाकृष्ण धानुका प्रकाशन संस्थान के द्वारा पूज्य चरणों की सरस लेखनी तथा पवित्र वाणी को प्रचारित कर मानव मात्र के कल्याण की मूर्तिमती सुधाधारा का प्रचार कर सम्पूर्ण विश्व में सुख-शान्ति के वातावरण के सर्जन की दिशा में अग्रसर होना चाहते हैं। इस दिशा में हम परम पूज्यवर के स्नेहिल शुभाशीष के संवल से ही सफलतापूर्वक आगे बढ़ सकते हैं। आज इस ग्रन्थ के पुनर्प्रकाशन के परम पुनीत अवसर पर हम पूज्य चरणों में अपनी विनम्न प्रणामाञ्जलि अर्पित करते हुए उनके सदुपदेशों, शास्त्रीय संदेशों तथा मानव कल्याण के निर्दिष्ट मानबिन्दुओं को प्रचारित-प्रसारित कर सकने की क्षमताप्राप्ति के मंगलमय आशीष की कामना करते हैं तथा इस ग्रन्थ के प्रकाशन का सुअवसर प्रदान करने के लिए पूज्यवर के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता अर्पित करते हैं।

‘भक्ति-सुधा साहित्य परिषद्, कलकत्ता’ तथा उसके प्रमुख कार्य संचालक कविराज श्री सीतारामजी शास्त्री तथा श्री बाबूलालजी गनेड़ीवाला को इसमें सहयोग देने के लिए हम हृदय से आभारी हैं। इस ग्रन्थ के सम्पादन, संशोधन तथा व्यवस्थितीकरण में पंडित गजानन शास्त्री मुसलगांवकरजी के प्रति हम अपना हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं। इसमें उद्धृत श्लोकों के स्थल-निर्देश का महत्त्वपूर्ण कार्य पंडित मार्कण्डेयजी ब्रह्मचारीजी ने किया है। हम इसके लिये उनके हृदय से आभारी हैं। उपर्युक्त विद्वानों के सतत् प्रयास से ही यह कार्य शीघ्र सम्पन्न हुआ था ।

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Bhakti Sudha (भक्ति सुधा)”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Quick Navigation
×