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Gandhi : Ek Samajik Krantikari (गाँधी : एक सामाजिक क्रांतिकारी)

20.00

Author Wilfred Wellock
Publisher Sarva Sewa Sangh Prakashan
Language Hindi
Edition 3rd edition
ISBN -
Pages 60
Cover Paper Back
Size 14 x 2 x 22 (l x w x h)
Weight
Item Code SSSP0040
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Description

गाँधी एक सामाजिक क्रांतिकारी (Gandhi Ek Samajik Krantikari) पश्चिम में जो थोड़े-से लोग सर्वोदय-विचारधारा को भलीभाँति समझते हैं, उनमें श्री विल्फ्रेड वेलॉक का स्थान अत्यन्त ही महत्त्वपूर्ण है। आपकी Gandhi as a Social Revolutionary पुस्तिका का प्रस्तुत अनुवाद अपने पाठकों के समक्ष उपस्थित करते हुए हमें बड़ी प्रसन्नता हो रही है। इसमें आपने बड़े ही अच्छे ढंग से बताया है कि गांधी ने सामाजिक क्रान्तिकारी के रूप में क्या किया है और उनके रचनात्मक कार्यक्रम में समाज-क्रान्ति के कैसे महान् तत्त्व भरे पड़े हैं। आपने युवकों का आह्वान किया है कि वे सत्य और अहिंसा की आधारशिला पर खड़ी इस क्रान्ति में भरपूर योगदान करें।

गांधीजी के जीवन और उनके विचार का रहस्य इस तथ्य में निहित है कि वे जीवन के बुनियादी सिद्धान्त के तौर पर अहिंसा में अडिग विश्वास रखते थे। अहिंसात्मक जीवन से उनका अभिप्राय यह था कि मानवीय सम्बन्धों में किसी भी प्रकार की सीमाओं, जैसे-नस्ल, वर्ण, धर्म, सम्प्रदाय, वर्ग अथवा जाति को स्वीकार न किया जाय। आध्यात्मिक प्रगति और विकास के लिए वे आत्मदान को आवश्यक मानते थे, क्योंकि उनकी मान्यता थी कि उसके द्वारा ही व्यक्ति की शक्तियों का चरम विकास होता है तथा समाज की अधिकतम सेवा होती है, जिसके द्वारा समाज का पूर्ण विकास होना सम्भव है।

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