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Maha Mrityunjay Jap Vidhi (महामृत्युञ्जय जप विधिः)

30.00

Author Kashi Nath Sharma Gaur
Publisher Shri Durga Pustak Bhandar Pvt. Ltd.
Language Sanskrit
Edition -
ISBN -
Pages 72
Cover Paper Back
Size 14 x 4 x 22 (l x w x h)
Weight
Item Code SDPB0019
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Description

महामृत्युञ्जय जप विधिः (Maha Mrityunjay Jap Vidhi) महामृत्युंजय मंत्र का जाप सुबह और शाम दोनों समय किया जा सकता है। अगर कोई संकट की स्थिति है तो इस मंत्र का जाप कभी भी किया जा सकता है। इस मंत्र का जाप शिवलिंग के सामने या भगवान शिव की मूर्ति के सामने करना ज्यादा बेहतर होता है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से करना चाहिए।

भगवान शिव की 5 वस्तुओं से प्रार्थना करें जो एक दीपक, धूप, जल, बेल के पत्ते और फल हैं। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय अपना मुख उत्तर, ईशान या पूर्व दिशा की ओर ही रखें। यदि आप शिवलिंग के पास बैठकर जाप कर रहे हैं तो जल या दूध से अभिषेक करते रहें।

शिवपुराण के अनुसार, इस मंत्र के जप से मनुष्य की सभी बाधाएं और परेशानियां खत्म हो जाती हैं। महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से मांगलिक दोष, नाड़ी दोष, कालसर्प दोष, भूत-प्रेत दोष, रोग, दुःस्वप्न, गर्भनाश, संतानबाधा कई दोषों का नाश होता है।

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