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Riti Kavya Dhara (रीती काव्यधारा)

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Original price was: ₹120.00.Current price is: ₹108.00.

Author Dr. Ramchandra Tiwari & Dr. Ramfer Tiwari
Publisher Vishwavidyalay Prakashan
Language Hindi
Edition 3rd edition, 2023
ISBN 978-81-7124-934-3
Pages 256
Cover Paper Back
Size 14 x 3 x 21 (l x w x h)
Weight
Item Code VVP0012
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Description

रीती काव्यधारा (Riti Kavya Dhara) प्रस्तुत संग्रह में रीतिकाल के रीतिबद्ध और रीति-मुक्त दोनों प्रकार के तेरह कवियों-केशव, सेनापति, बिहारी, देव, मतिराम, भूषण, भिखारीदास, प‌द्माकर, आलम, ठाकुर, बोधा, घनआनंद, द्विजदेव की चुनी हुई श्रेष्ठ कवितायें संगृहीत हैं। चुनी हुई कविताओं का पाठ यथासंभव मूल और प्रामाणिक कृतियों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। केशव, भिखारीदास, प‌द्माकर, आलम, ठाकुर, बोधा, घनआनंद आदि कवियों की चुनी हुई कविताओं के पाठ का आधार आचार्य विश्वनाथप्रसाद मिश्र द्वारा संपादित उपर्युक्त कवियों की ग्रंथावलियों हैं। सेनापति का पाठ श्री उमाशंकर शुक्ल द्वारा संपादित ‘कवित्त रत्नाकर’, बिहारी का श्री जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’ द्वारा संपादित ‘बिहारी रत्नाकर’, देव और भूषण का मिश्र बंधुओं द्वारा संपादित ‘देवसुधा’ और ‘भूषण ग्रंथावली’ तथा मतिराम का श्री कृष्णबिहारी मिश्र द्वारा संपादित ‘मतिराम ग्रंथावली’ के अनुसार रखा गया है।

संग्रह के आरंभ में रीतिकालीन काव्य का सामान्य परिचय कराने के लिए लगभग २६ पृष्ठों की भूमिका दी गयी है। संगृहीत कवियों की कविताओं के साथ उनका (कवियो का) विस्तृत एवं प्रामाणिक परिचय भी दिया गया है। संग्रह के अंत में संगृहीत कविताओं का तात्पर्य स्पष्ट करने के लिए शब्दार्थ और टिप्पणियाँ देकर संग्रह को उपयोगी बनाने की चेष्टा की गयी है। संग्रह की भूमिका, रीतिबद्ध कवियों की कविताओं का चयन तथा उन कवियों का परिचय एवं अंत में उनकी कविताओं का शब्दार्थ-लेखन मैंने किया है। रीतिमुक्त कवियों से संबंधित सारा कार्य मेरे मित्र डॉ० रामफेर त्रिपाठी (पूर्व उपाचार्य, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने किया है। यदि डॉ० त्रिपाठी का सहयोग न मिला होता तो यह संग्रह वर्तमान रूप में प्रस्तुत न हो पाता। हम दोनों ने प्रयत्न किया है कि यह संग्रह न केवल विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो वरन् सामान्य साहित्यनुरागियों को भी रीति काव्यधारा का ठीक-ठीक परिचय करा सके। यदि हिन्दी-जगत् ने इस संग्रह का स्वागत किया तो हमारा श्रम सार्थक होगा।

1 review for Riti Kavya Dhara (रीती काव्यधारा)

  1. Gopal

    Thanku you bharatiya vidya. com ☺

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