Shat Panchashika (षट्पञ्चाशिका)
₹20.00
| Author | Kritidatt Jha |
| Publisher | Bharatiya Vidya Sansthan |
| Language | Sanskrit & Hindi |
| Edition | 1st edition, 1997 |
| ISBN | - |
| Pages | 50 |
| Cover | Paper Back |
| Size | 12 x 1 x 18 (l x w x h) |
| Weight | |
| Item Code | BVS0177 |
| Other | - |
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CompareDescription
षट्पञ्चाशिका (Shat Panchashika) अनेक प्रमाणों से स्पष्ट है कि वेदाङ्गों में ज्योतिष शास्त्र की प्रधानता है, और निस्कन्धात्मक ज्योतिष शास्त्र में भी प्रश्न-सम्बन्धी विषय का सर्वत्र सभी को विशेष प्रयोजन होता है क्योंकि जन्मपत्री के बिना भी केवल प्रश्न मात्र से ही ज्योतिष शास्त्र की युक्तियों द्वारा सभी बातें विचार कर बतायी जा सकती हैं। अतः वराहमिहिरात्मज-दैवज्ञ-पृयुपशो-विरचित प्रश्न-विषयक विचार के लिये “षट्पञ्चाशिका” नाम की पुस्तक कितनी उपयोगी हैं यह आप लोगों को विदित है। यद्यपि इस पुस्तक की बहुत सी टीकायें प्रकाशित हो चुकी है किन्तु वे मनमानी होनेके कारण फलादेश में समुचित नहीं होतो, इसलिये उत्पल-वैवज्ञकी भट्टोत्पली टोका की भाषा टीकाके साथ-साथ जगह-जगह पर विशेष बातें भी आवश्यकतानुसार दे दी गई हैं। यदि इससे आप लोगों का कुछ भी प्रयोजन सिद्ध हुना तो मैं अपने परिश्रम को सफल समझेंगा।





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