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Srimad Bhagavd Gita (श्रीमद्भगवतगीता श्लोकार्थसहित) – 1566

40.00

Author -
Publisher Gita Press, Gorakhapur
Language Sanskrit & Hindi
Edition 54th edition
ISBN -
Pages 298
Cover Hard Cover
Size 10 x 2 x 14 (l x w x h)
Weight
Item Code GP0118
Other Code - 1566

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Description

श्रीमद्भगवतगीता श्लोकार्थसहित (Srimad Bhagavd Gita) वास्तव में श्रीमद्भगवद्‌गीता का माहात्म्य वाणी द्वारा वर्णन करने के लिये किसी की भी सामर्थ्य नहीं है; क्योंकि यह एक परम रहस्यमय ग्रन्थ है। इसमें सम्पूर्ण वेदों का सार-सार संग्रह किया गया है। इसका संस्कृत इतना सुन्दर और सरल है कि थोड़ा अभ्यास करने से मनुष्य उसको सहज ही समझ सकता है। इसका आशय इतना गम्भीर है कि आजीवन निरन्तर अभ्यास करते रहने पर भी उसका अन्त नहीं आता।

प्रतिदिन नये-नये भाव उत्पन्न होते रहते हैं, इससे यह सदैव नवीन बना रहता है एवं एकाग्रचित्त होकर श्रद्धा-भक्ति सहित विचार करने से इसके पद-पद में परम रहस्य भरा हुआ प्रत्यक्ष प्रतीत होता है। भगवान्के गुण, प्रभाव और मर्म का वर्णन जिस प्रकार इस गीता शास्त्र में किया गया है, वैसा अन्य ग्रन्थों में मिलना कठिन है; क्योंकि प्रायः ग्रन्थों में कुछ-न-कुछ सांसारिक विषय मिला रहता है। भगवान्ने ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ रूप एक ऐसा अनुपमेय शास्त्र कहा है कि जिसमें एक भी शब्द सदुपदेश से खाली नहीं है।

इस गीता शास्त्र में मनुष्य मात्र का अधिकार है, चाहे वह किसी भी वर्ण, आश्रम में स्थित हो; परंतु भगवान्में श्रद्धालु और भक्ति युक्त अवश्य होना चाहिये; क्योंकि भगवान्ने अपने भक्तों में ही इसका प्रचार करने के लिये आज्ञा दी है तथा यह भी कहा है कि स्त्री, वैश्य, शूद्र और पापयोनि भी मेरे परायण होकर परमगति को प्राप्त होते हैं (अ० ९ श्लोक ३२); अपने-अपने स्वाभाविक कर्मों द्वारा मेरी पूजा करके मनुष्य परम सिद्धि को प्राप्त होते हैं (अ० १८ श्लोक ४६) – इन सब पर विचार करने से यही ज्ञात होता है कि परमात्मा की प्राप्ति में सभी का अधिकार है।

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