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Kuvalyananda (कुवलयानन्दः)

425.00

Author Prof. Jay Shankarlal Tripathi
Publisher Chaukhambha Sanskrit Series Office
Language Hindi & Sanskrit
Edition 2016
ISBN 978-81-7080-185-0
Pages 738
Cover Paper Back
Size 14 x 2 x 22 (l x w x h)
Weight
Item Code CSSO0581
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Description

कुवलयानन्दः (Kuvalyananda) पुस्तक संस्कृत का एक अनमोल ग्रन्थ है। जिसके संपादक एवं हिंदी व्याख्याकार प्रो जयशंकरलाल त्रिपाठी जी है। यह पुस्तक रसिकरंजनी संस्कृत टीका तथा आचार्य-जयशंकरलाल त्रिपाठी विरचित “भावबोधिनी” हिंदी व्याख्या सहित है। इस पुस्तक में कुल ७३८ पृष्ठ है, जो पेपरबैक संस्करण में उपलब्ध है। वर्त्तमान में पुस्तक का तीसरा संस्करण उपलब्ध है जो २०१६ में प्रकाशित है। यह पुस्तक चौखम्बा संस्कृत सीरीज ऑफिस द्वारा प्रकाशित की गई है।

इसमें केवल अर्थालङ्कारों पर ही विचार किया गया है। कुवलयानन्द की रचना का मुख्य आधार जयदेवविरचित ‘चन्द्रालोक’ ग्रन्थ का पंचम मयूख है। दीक्षित ने स्पष्ट लिखा है कि जिन अलंकारों का विवेचन चन्द्रालोक में है उनको यहाँ भी प्रायः उसी रूप में लक्षण-लक्ष्य के साथ उपस्थापित किया गया है किन्तु जो नवीन अलंकार माने गये हैं उनके लक्षण और लक्ष्य (उदाहरण) नवीन कल्पित किये गये हैं

येषां चन्द्रालोके दृश्यन्ते लक्ष्य-लक्षणश्लोकाः।
प्रायस्त एव तेषामितरेषां त्वभिनवा विरच्यन्ते ।।

इतना अवश्य है कि दीक्षित ने चन्द्रालोक की प्रतिपादन शैली का इतना सफल अनुकरण किया है कि दोनों ग्रन्थों का अन्तर समझ पाना कुछ कठिन है। कुवलयानन्द में कुल मिलाकर २७३ श्लोक है जिनमें आदि के मङ्गलाचरण और समाप्ति के श्लोक भी सम्मिलित है।

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